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Makar Sankranti in Hindi 2021 – मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

जनवरी का महीना चल रहा है और हिन्दू धर्म के त्यौहार अब शुरू हो रहे है जिसमे इस साल का पहला त्यौहार है मकर संक्रांति और आपके मन में सवाल आया होगा की आखिर मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है और इसे आपने सर्च इंजिन में Makar Sankranti in Hindi वर्ड से सर्च किया होगा। आपको आजकी लेख में हम Makar Sankranti 2021 के बारे में हर एक जानकारी मुहैय्या करेंगे ताकि आपको किसी और वेबसाइट पर जाना न पड़े. तो चलिए शुरुवात करते है.

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Makar Sankranti in Hindi 2021 – Makar sankranti ki jankari hindi mein

मकर संक्रांति भारत का प्रमुख पर्व और ये त्यौहार भारत के विभिन्न राज्यों में तथा शहरों और गावों के लोग बरसों से चली आ रही परम्परोओं के अनुसार मनाते है. मकर संक्रान्ति हर साल जनवरी के 14 वे या 15 वे दिन आती है और इस दिन भारत के अलग-अलग भागों में नदी के किनारे जल स्नान का आयोजन होता है. Makar sankaranti पुरे भारत के साथ साथ विश्व के कुछ देशों में भी अलग अलग मनाया जाता है, इसी तरह से भारत में भी ये प्रमुख पर्व अलग अलग राज्यों में विभिन्न नामों से मनाया जाता है.

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है – मकर संक्राति किसे कहते है और इस दिन का महत्त्व

Makar Sankranti Ka Mahatva: भारतीय ज्योतिष में 12 राशियों में से एक मकर राशि में सूर्य के प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं। इसे हिंदुओं का बड़ा दिन भी कहा जाता है। मकर संक्रांति शिशिर ऋतु की समाप्ति और वसंत के आगमन का प्रतीक है। इसे भगवान भास्कर की उपासना एवं स्नान-दान का पवित्रतम पर्व माना गया है।

मकर संक्रांति कब है 2021 – 14 january 2021 ko kya hai

मकर संक्रांति इस साल 14 जनवरी 2021 को है इस दिन धनु राशि को छोड़ कर  मकर राशि में भास्कर देव का आगमन सुबह 8:14 बजे होगा।

14 जनवरी को मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?

हिन्दू शास्त्र के पारम्परिक मान्यताओं से 14 जनवरी के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच के समय को सौर मास है.

मकर संक्रांति क्या है?

मकर संक्रांति का पर्व जीवन में संकल्प लेने का दिन भी कहा गया है। संक्रांति यानी सम्यक क्रांति। इस दिन से सूर्य की कांति में परिवर्तन शुरू हो जाता है। वह दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर अभिमुख हो जाता है। उत्तरायण से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। अंधकार घटने लगता है और प्रकाश में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। जब प्रकृति शीत ऋतु के बाद वसंत के आने का इंतजार कर रही होती है, तो हमें भी अज्ञान के तिमिर से ज्ञान के प्रकाश की ओर मुड़ने और कदम तेज करने का मन बनाना चाहिए।

महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से बिंधे शर शय्या में लेटे भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन तक प्राण न छोड़ने का संकल्प लिया था। आज के दिन मन और इंद्रियों पर अंकुश लगाने के संकल्प के रूप में भी यह पर्व मनाया जाता है। लोग नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करने जाते हैं। इस दिन तिल, गुड़ के व्यंजन, ऊनी वस्त्र, काले तिल आदि खाने और दान करने का विधान है। मकर संक्रांति ही एक ऐसा त्योहार है, जिसमें तिल का प्रयोग किया जाता है।

माघ मास में पड़ने वाला मकर संक्रांति का पर्व असम में बिहू कहलाता है। पंजाब में इसे लोहड़ी, बंगाल में संक्रांति और समस्त भारत में मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। सर्दी का प्रकोप शांत करने के लिए सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस ऋतु में रोजाना प्रात:काल सूर्य को एक लोटा जल चढ़ाने से सारे रोग दूर हो जाते हैं। सूर्य का बारह राशियों से युक्त रथ आकाश के चारों ओर घूमता है। इसी के साथ ऋतुओं में परिवर्तन होता है।

मकर संक्रांति वैज्ञानिक कारण

मकर संक्रांति के पर्व पर गुड़, घी, खिचड़ी बनाने के पीछे भी वैज्ञानिक आधार है। यह पर्व सदा 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। मकर संक्रांति सामाजिक समरसता का पर्व है। मान्यता है कि तिल, घी, गुड़ और काली उड़द की खिचड़ी का दान और उसका सेवन करने से शीत का प्रकोप शांत होता है। दक्षिण भारत में बालकों के विद्याध्ययन का पहला दिन मकर संक्रांति से शुरू कराया जाता है। प्राचीन रोम में इस दिन खजूर, अंजीर और शहद बांटने का उल्लेख मिलता है। ग्रीक के लोग वर-वधू को संतान-वृद्धि के लिए तिल से बने पकवान बांटते थे।

मकर संक्रांति का भौगोलिक महत्व

जम्मू-कश्मीर और पंजाब में यह पर्व लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है, जो संक्रांति के एक दिन पहले संपन्न होती है। सिंधी लोग इसे लाल लोही के नाम से जानते हैं। तमिलनाडु में लोग कृषि देवता के प्रति कृतज्ञता दर्शाने के लिए नई फसल के चावल और तिल के भोज्य पदार्थ से विधिपूर्वक पोंगल मनाते हैं। दक्षिण भारत में पोंगल, पश्चिम यूपी में संकरात, पूवीर् यूपी और बिहार में खिचड़ी के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है।

खिचड़ी का आयोजन मौसम के मिले-जुले रूप के स्वागत के तौर पर किया जाता है। दाल-चावल मिलाकर खिचड़ी बनाने का तर्क यह है कि चावल की तासीर ठंडी होती है और दाल की गरम। जिस तरह इस समय ऋतुओं में गरम और ठंडे का समायोजन होता है, ठीक उसी तरह का समायोजन आहार में भी किया जाता है, ताकि बदलते मौसम का स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव न पड़े। कई जगहों पर इस दिन मेले लगते हैं। पूर्वान्चल में इस दिन गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने का प्रचलन है।

इस दिन गंगा सागर में स्नान का माहात्म्य है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन देवता भी धरा पर उतर आते हैं। कहीं-कहीं काले कपड़े पहनने का भी रिवाज है। आज के दिन गंगा स्नान का विशेष पुण्य बखान किया गया है।

मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व

ऐसे मन जाता है की शनि महाराज मकर इस राशि के स्वामी है और संक्रांति दिन भगवान् सूर्य उनके पुत्र शनि से मिलने के लिए खुद उनके यहां जाते है इसी लिए इस दिन को मकर संक्राति कहते है और इस दिन का महत्व है. महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से बिंधे शर शय्या में लेटे भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन तक प्राण न छोड़ने का संकल्प लिया था।

भारत के राज्य और मकर संक्रांति के अलग अलग नाम

अलग अलग राज्यों में मकर संक्राति को विभिन्न नाम से मनाया जाता है. कौनसे राज्य में इस उत्सव को क्या कहते है इसकी पूरी लिस्ट हमें आगे बताई है.

मकर संक्रान्ति किन राज्यों में कहा जाता है:

  • छत्तीसगढ़
  • गोआ,
  • ओड़ीसा,
  • हरियाणा,
  • बिहार,
  • झारखण्ड,
  • आंध्र प्रदेश,
  • तेलंगाना,
  • कर्नाटक,
  • केरल,
  • मध्य प्रदेश,
  • महाराष्ट्र,
  • मणिपुर,
  • राजस्थान,
  • सिक्किम,
  • उत्तर प्रदेश,
  • उत्तराखण्ड,
  • पश्चिम बंगाल,
  • गुजरात
  • जम्मू

मकर संक्रांति को ताइ पोंगल या उझवर तिरुनल किस राज्य में कहते है:

  • तमिलनाडु

उत्तरायण किस राज्य में कहते है:

  • गुजरात
  • उत्तराखण्ड
  • राजस्थान

माघी किस राज्य में कहते है:

  • हरियाणा
  • हिमाचल प्रदेश
  • पंजाब

भोगाली बिहु:

  • असम

शिशुर सेंक्रात:

  • कश्मीर घाटी

खिचड़ी:

  • उत्तर प्रदेश
  • पश्चिमी बिहार

पौष संक्रान्ति :

  • पश्चिम बंगाल

मकर संक्रमण :

  • कर्नाटक

लोहड़ी :

  • पंजाब

विश्व में विभिन्न नाम

जिस तरह भारत में मकर संक्रांति अलग अलग नाम से मनाया जाता है उसी तरह से भारत के बहार पुरे विश्व में ये उत्सव अलग अलग नाम  से मनाया जाता है.

  • बांग्लादेश :  पौष संक्रान्ति
  • नेपाल : माघे संक्रान्ति या ‘माघी संक्रान्ति’ ‘खिचड़ी संक्रान्ति’
  • थाईलैण्ड : सोंगकरन
  • लाओस : पि मा लाओ
  • म्यांमार : थिंयान
  • कम्बोडिया : मोहा संगक्रान
  • श्रीलंका : पोंगल, उझवर तिरुनल
आपने क्या सीखा?

आपने इस पोस्ट में हिन्दू धर्म का उत्सव मकर संक्रांति 2021 के बारे सारी जानकारी पढ़ी और ये त्यौहार क्यों मनाया जाता है यह सीखा। यदि आपको ये पोस्ट पसंद आयी हो तो अपने प्रियजनों के साथ जरूर शेयर करे ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे डीटीएच हेल्पर को विजिट करते रहे.

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